✦ Apne Nafs aur Shaitan ki burayee se bachane ki dua
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✦ Abu Bakr Radi Allahu Anhu ne Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam se kaha ki mujhe subah aur sham ko koi dua padhne ka hukm de dijiye to Aap Sal-Allahu Alaihi Wasalam ne farmaya is dua ko tum subah ko sham ko aur sote waqt padh liya karo
Ash-hadu an la ilaha illa anta, Audhu bika min sharri nafsi wa min sharrish-shaiṭāni washirkihi)
✦ Tarjuma : Eh Allah Eh gaib aur khuli baato ko janne wale , Aasman aur zameen ko palne wale , har cheez ke RABB aur malik ,main gawahi deta hu ki tere siwa koi mabud nahi aur main tujhse apne nafs ki burayee aur shaitan ki burayee aur uske shrik se panah maangta hu
Jamia Tirmizi, Jild 2,1316-Sahih
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ابوبکر رضی الله عنہ نے عرض کیا: اللہ کے رسول! مجھے کوئی ایسی چیز بتا دیجئیے جسے میں صبح و شام میں پڑھ لیا کروں، آپ نے فرمایا: ”کہہ لیا کرو: «اللهم عالم الغيب والشهادة فاطر السموات والأرض رب كل شيء ومليكه أشهد أن لا إله إلا أنت أعوذ بك
من شر نفسي ومن شر الشيطان وشركه» ”اے اللہ! غائب و حاضر، موجود اور غیر موجود کے جاننے والے، آسمانوں اور زمین کے پیدا کرنے والے، ہر چیز کے مالک! میں گواہی دیتا ہوں کہ تیرے سوا کوئی معبود برحق نہیں ہے، میں اپنے نفس کے شر سے
تیری پناہ چاہتا ہوں، میں شیطان کے شر اور اس کی دعوت شرک سے تیری پناہ چاہتا ہوں“، آپ نے فرمایا: ”یہ دعا صبح و شام اور رات کو سوتے وقت پڑھ لیا کرو
جامع ترمزی ٣٣٩٢ حسن
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✦ अबू बक्र रदी अल्लाहू अन्हु ने रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम से कहा की मुझे सुबह और शाम को कोई दुआ पढ़ने का हुक्म दे दीजिए तो आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया इस दुआ को तुम सुबह को शाम को और सोते वक़्त पढ़ लिया करो
✦ अल्लहुम्मा आलीमल-गैबी वा अश-शहादती फ़ातिर अस-सामावती वा अल-अर्द , रब्बा कुल्ली शैइन वा मालिकाहु, अश्-हदू अन ला ईलाहा इल्ला अन्ता , आवुजूबिका मीन शर्री नफसी वा मीन शर्री अश-शैतान वा शिरकीही
✦ तर्जुमा : एह अल्लाह एह गैब और खुली बातो को जानने वाले , आसमान और ज़मीन को पालने वाले , हर चीज़ के रब्ब और मालिक ,
मैं गवाही देता हूँ की तेरे सिवा कोई माबूद नही और मैं तुझसे अपने नफ्स की बुराई और शैतान की बुराई और उसके शिर्क से पनाह माँगता हूँ
जामिया तिरिमिज़ी , 1316 जिल्द 2-सही
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✦ Abu Bakr said: O Messenger of Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam , command me with something that I may say when I reach morning and evening. He Sal-Allahu Alaihi Wasallam said Say it when you reach morning, and evening, and when you go to bed.
Ash-hadu an la ilaha illa anta, Audhu bika min sharri nafsi wa min sharrish-shaiṭāni washirkihi
✦ O Allah Knower of the Unseen and the Seen, Originator of the heavens and the earth, Lord of everything and its Possessor, I bear witness that there is none worthy of worship except You, I seek refuge from You from the evil of my soul and from the evil of Shaitan and his Shirk
Hadith : Jis ne Shaam Ke Waqt Ye dua padhi to usne us raat ka shukr adaa Kar diya
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✦ Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam ne farmaye Jis ne Subah ke Waqt Ye dua padhi to usne us din ka shukr adaa Kar diya aur jisne shaam ke waqt padhi to Usne us raat ka shukr adaa Kar diya
Allahumma Ma Amsa bi min ni’matin Aw bi-ahadin min khalqika fa minka
wahdaka la shareeka laka ,Falakal-Hamd, walakash-shukr
✦Tarjuma: Ya Allah Shaam ko jo naimat mere paas hai ya teri kisi makhluq ke pass hai wo teri hi di huyee hai , Tu Akela hai tera koi Sharik nahi , tere hi liye sari tarifen hain aur tere hi liye shukr hai.
Sahih Ibn Hibban, 868-Hasan, Shuab-ul-Iman, Al Baihiqi 4053-Sahih
Al-Sunan Al-Kubra, An-Nasaii, 9447-Sahih
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رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا: جس نے شام کے وقت یہ دعا پڑھی
اے اللہ! شام کو جو نعمتیں میرے پاس ہیں یا تیری کسی ملخلق کے پاسس ہیں وہ تیری ہی دی ہوئی ہیں، تو اکیلا ہے۔ تیرا کوئی شریک نہیں ہے،تیرے ہی لئے سری تعریفیں ہیں اور تیرے ہی لئے شکر ہے
صحيح ابن حبان ٨٦٨-حسن
شعب الإيمان للبيهقي ٤٠٥٣-صحیح
السنن الكبرى للنسائي ٩٤٤٧ -صحیح
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इब्न अब्बास रदी अल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फ़रमाया जिस ने शाम के वक़्त ये दुआ पढ़ी तो उसने उस रात का शुक्र अदा कर दिया
अल्लाहुम्मा मा अमसा बी मीन निअमतीन अव बी-अहदिन मीन खलक़ीका, फा मिनका वाहदका ला शरीका लका ,फलकाल-हम्द , वा लकाअश-शुक्र
✦ या अल्लाह शाम को जो नैमत मेरे पास है या तेरी किसी मखलूक़ के पास है वो तेरी ही दी हुई है , तू अकेला है तेरा कोई शरीक नही , तेरे ही लिए सारी तारीफें हैं और तेरे ही लिए शुक्र है.
सही इब्न हीब्बान , 868-हसन
शुअब-उल-ईमान , अल बैहिक़ी 4053-सही
अल-सुनन अल-कुबरा ,अन-नसाई , 9447-सही
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✦ Ibn Abbas Radi Allahu anhuma se rivayat hai ki Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam said If anyone says these words in the Evening he will be, as he has given thanks to Allah Subhanahu for the whole Night.
Allahumma Ma Amsa bi min ni’matin Aw bi-ahadin min khalqika fa minka
wahdaka la shareeka laka ,Falakal-Hamd, walakash-shukr
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✦Translation: O Allah! In the Evening, whatever favor has come to me , or anyone else from your creatures , it is all from You alone, You have no partner, For you, is all the praise, And to You, is all the gratefulness.
✦ Abdul rahman bin Abu bakr Radi Allahu Anhu se rivayat hai ki unhone apne walid se pucha ki Abbu jaan main aapko har subah aur sham ko teen martaba ye dua padhte huye sunta hu
✦ Allahumma Aafini fi badani, Allahumma Aafini fi samaee, Allahumma aafini fi Bashari, La ilaha illa Anta.
✦ Ya Allah tu mere badan mein aafiyat ata farma , Ya Allah tu mere kaano mein aafiyat ata farma ,Ya Allah tu meri nigaho mein aafiyat ata farma tere siwa koi maabud nahi
to unhone kaha ki maine Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam ko yahi dua isee tarah padhte huye suna hai aur mujhe pasand hai ki main unki sunnat par amal karta rahu
Sunan Abu Dawood, Jild 3, 1649-Hasan
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عبد الرحمن بن ابو بکرہ رضی الله عنه سے روایت ہے کی انہونے اپنے والد سے دریافت کیا کی ابو جان! میں آپ کو ہر صبح یہ دعا پڑھتے ہوئے سنتا ہوں
اے اللہ! تو میرے بدن میں عافیت عطا فرما ، یا اللہ تو میرے کانوں میں عافیت عطا فرما، اے اللہ تو میری نگاہوں میں عافیت عطا فرما، تیرے سوا کوئی معبود نہیں آپ اسے تین مرتبہ دہراتے ہیں جب صبح کرتے ہیں اور تین مرتبہ جب شام کرتے ہیں؟، تو انہوں نے کہا: میں نے رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم کو یہی دعا کرتے ہوئے سنا ہے، اور مجھے پسند ہے کہ میں آپ کی سنّت پر عمل کرتا رہوں ۔
سنن ابو داوود جلد ٣ / ١٦٤٩ -حسن
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✦ अब्दुल रहमान बिन अबू बक्र रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की उन्होने अपने वालिद से पूछा की अब्बू जान मैं आपको हर सुबह और शाम को तीन मर्तबा ये दुआ पढ़ते हुए सुनता हूँ
✦ या अल्लाह तू मेरे बदन में आफियत अता फरमा , या अल्लाह तू मेरे कानों में आफियत अता फरमा,
या अल्लाह तू मेरी निगाहों में आफियत अता फरमा, तेरे सिवा कोई माबूद नही तो उन्होने कहा की मैने रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम को यही दुआ पढ़ते हुए सुना है और मुझे पसंद है की मैं उनकी सुन्नत पर अमल करता रहूँ
सुनन अबू दाऊद, जिल्द 3, 1649-हसन
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✦ Abdur Rahman ibn Abu Bakr said that he told his father: O my father! I hear you supplicating every morning:
इन अज़कार को रोज़ शाम आप पढ़ने की आदत बना लीजिये इन शा अल्लाह आपकी दुनिया और आख़िरत बेहतरीन हो जाएगी और आप बहुत सारी मुसीबतों, परेशानियों, और हादसों से मेहफ़ूज़ रहोगे
✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो कोई इसको (आयात अल कुर्सी को) सुबह पढ़ लेगा तो शाम तक शैतान से महफूज़ रहेगा और जो शाम को पढ़ लेगा वो सुबह तक शैतान से महफूज़ रहेगा
✦ अब्दुल्लाह बिन खुबेब रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया सुबह और शाम 3 बार सुरह अल-इख्लास और सुरह अल-फलक़ और सुरह अन-नास पढ़ लिया करो, ये तुम्हें हर चीज़ के लिए काफ़ी हो जाएगी (यानि हर तरह की परेशानियो से बचने के लिए ये काफी हैं)
सय्यद-अल-अस्तिगफार: अल्लाह से मगफिरत मांगने का सबसे अच्छा तरीक़ा) ये है जिसने इस दुआ के अल्फाज़ पर यकीन रखते हुए दिन में इसको पढ़ लिया और उसी दिन शाम होने से पहले उसकी मौत हो गयी तो वो जन्नती है और जिसने इस दुआ के अल्फाज़ पर यकीन रखते हुए रात में इसको पढ़ लिया और फिर सुबह होने से पहले उसकी मौत हो गयी तो वो जन्नती है
✦ तर्जुमा : एह अल्लाह तू मेरा रब है तेरे सिवा कोई माबूद नहीं , तूने ही मुझे पैदा किया है और मैं तेरी ही बंदा हूँ , मैं अपने ताक़त के मुताबिक़ तुझसे किये हुए अहद
और वादे पर क़ायम हूँ , मैं तुझसे उस चीज़ की शर (बुराई) से पनाह मांगता हूँ
जिसका मैंने इरतकाब किया , मैं तेरे सामने तेरी नेमतों का इकरार करता हूँ जो मुझे अता की हैं
और मैं अपने गुनाहों का इकरार करता हूँ, तू मुझे माफ़ कर दे , बेशक तेरे सिवा गुनाहों को कोई माफ़ करने वाला नहीं है
6✦ जिस शख्स ने 3 बार ये कहा तो अल्लाह उसको पूरी तरह आग से आज़ाद फरमा देते हैं
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✦ सलमान फ़ारसी रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जिस शख्स ने 1 बार ये कलिमात कहे तो अल्लाह सुबहानहु उसका एक तिहाई (1/3) हिस्सा आग से आज़ाद फरमा देते हैं, जिस शख्स ने 2 बार ये कलिमात कहे तो
अल्लाह सुबहानहु उसका दो तिहाई (2/3) हिस्सा आग से आज़ाद फरमा देते हैं जिस शख्स ने 3 बार ये कलिमात कहे तो अल्लाह सुबहानहु उसको पूरी तरह आग से फरमा देते हैं
✦ अल्लहुम्मा इन्नी उशहिदुका वा उशहिदु मलईकाताका वा हमालता अरशीक
वा उशहिदु मन फ़िस-समावाती वा मन फ़िल-अर्द
अन्नका अन्ता अल्लाह ला ईलाहा इल्ला अन्त .वाहदका का ला शरीका लक,
वा अशहदू अन्ना मुहम्मदन अबदुका वरसूलूक
✦ एह अल्लाह मैं तुझे गवाह बनाता हूँ, और तेरे फरिश्तों और तेरा अर्श उठाने वालो को गवाह बनाता हूँ, और आसमान और ज़मीन में मौजूद मखलूक़ को गवाह बनाता हूँ,
की तू ही अल्लाह है और तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नही, तू अकेला है, तेरा कोई शरीक नही और मैं गवाही देता हूँ की मुहम्मद सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम तेरे बंदे और रसूल है
7✦ जिस ने शाम के वक़्त ये दुआ पढ़ी तो उसने उस शाम का शुक्र अदा कर दिया
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इब्न अब्बास रदी अल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फ़रमाया जिस ने शाम के वक़्त ये दुआ पढ़ी तो उसने उस दिन का शुक्र अदा कर दिया
अल्लाहुम्मा मा अमसा बी मीन निअमतीन अव बी-अहदिन मीन खलक़ीका, फा मिनका वाहदका ला शरीका लका ,फलकाल-हम्द , वा लकाअश-शुक्र
✦ या अल्लाह शाम को जो नैमत मेरे पास है या तेरी किसी मखलूक़ के पास है वो तेरी ही दी हुई है , तू अकेला है तेरा कोई शरीक नही , तेरे ही लिए सारी तारीफें हैं और तेरे ही लिए शुक्र है.
अब्दुल रहमान बिन अबू बक्र रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की उन्होने अपने वालिद से पूछा की अब्बू जान मैं आपको हर सुबह और शाम को तीन मर्तबा ये दुआ पढ़ते हुए सुनता हूँ
अबू बक्र रदी अल्लाहू अन्हु ने रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम से कहा की मुझे सुबह और शाम को कोई दुआ पढ़ने का हुक्म दे दीजिए तो आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया इस दुआ को तुम सुबह को शाम को और सोते वक़्त पढ़ लिया करो
✦ अल्लहुम्मा आलीमल-गैबी वा अश-शहादती फ़ातिर अस-सामावती वा अल-अर्द,
रब्बा कुल्ली शैइन वा मालिकाहु, अश्-हदू अन ला ईलाहा इल्ला अन्ता
आवुजूबिका मीन शर्री नफसी वा मीन शर्रीश-शैतानि वा शिरकीह
✦ तर्जुमा: एह अल्लाह एह गैब और खुली बातो को जानने वाले, आसमान और ज़मीन को पालने वाले, हर चीज़ के रब्ब और मालिक, मैं गवाही देता हूँ की तेरे सिवा कोई माबूद नही,
मैं तुझसे अपने नफ्स की बुराई और शैतान की बुराई और उसके शिर्क से पनाह माँगता हूँ
बिस्मिल्लहिल्लज़ी ला यदुर्रू मा-असमीही शयउन फील-अर्दी वा ला फिस-समाई ,
वा हुवा अस समीउल-अलीम
अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ जिसके नाम की बरकत से ज़मीन और आसमान की कोई चीज़ नुकसान नही पहुंचा सकती और वही सुनने वाला और जानने वाला है
✦ अबान बिन उसमान रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की मैने उसमान रदी अल्लाहू अन्हु से सुना रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अललीही वसल्लम ने फरमाया जिसने (शाम को) 3 मर्तबा ये दुआ पढ़ी उसे सुबह तक कोई नागहानी (अचानक) मुसीबत नही पहुचेगी और जिसने सुबह को 3 मर्तबा ये दुआ पढ़ी उसको शाम तक उसको कोई नागहानी (अचानक) मुसीबत नही पहुचेगी
✦ अबान बिन उसमान रदी अल्लाहू अन्हु को फालीज़ यानि लकवा हो गया था तो वो शख्स जिसने उनसे ये हदीस रिवायत की थी वो उन्हे देखने लगा तो अबान रदी अल्लाहु अन्हु ने उनसे फरमाया की तुझे क्या हो गया है की इस तरह मेरी तरफ देखता है, अल्लाह की कसम मैने ना तो उसमान रदी अल्लाहू अन्हु पर और ना रसूल-अल्लाह सललाल्लाहू अलैही वसल्लम पर झूट बाँधा है लेकिन जिस रोज़ मुझे ये फालीज़ (लकवा) हुआ उस रोज़ मैं गुस्से में था और ये दुआ पढना भूल गया
12 ✦ जो इस दुआ को सुबह शाम पढ़ेगा तो अल्लाह सुब्हानहु क़यामत के दिन उसको जरूर खुश फरमा देंगे
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रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के खादिम, अबू सलाम रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो भी मुसलमान या इंसान
(या बंदा) सुबह शाम ये कलिमात कहे तो अल्लाह सुबहानहु उसको क़यामत के दिन ज़रूर खुश फरमा देंगे
✦ या हय्यू या क़य्यूम, बि-राहमातिका अस्तगीस, वाअसलिहली शाअनि कुल्लाहू,
वाला ताकिलनी इला नफसी तरफता अयनिन अबादा
✦ एह ज़िंदा हमेशा क़ायम रहने वाले तेरी रहमत के ज़रिए से फ़रियाद करता हूँ, मेरे तमाम हालात दुरुस्त कर दे और कभी भी पलक झपकने के बराबर भी मुझे मेरे नफ़स के हवाले ना कर.
14✦ सुबहान अल्लाहिल अज़ीम वा बिहम्दिही कहने की फ़ज़ीलत
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سُبْحَانَ اللّهِ الْعَظِيمِ وَ بِحَمْدِهِ
सुबहान अल्लाहिल अज़ीम वा बिहम्दिही
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✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो शख्स सुबह के वक़्त 100 बार सुबहान अल्लाहिल अज़ीम वा बिहम्दिही पढ़ेगा और उसी तरह शाम को भी (100 बार) पढ़ेगा तो उसके बराबर मख्लूक़ में से किसी का दर्जा नहीं होगा
15✦ रसूल -अल्लाह सल-अल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जिस ने ये कलमा दिन में 10 मर्तबा पढ़ लिया उसको इतना सवाब होगा जैसे हज़रत इस्माईल अलैहि सलाम की औलाद में से 4 गुलामों को आज़ाद करवाया
अस्तगफिरुल्लाहल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवा अल हय्युल-कय्यूम वा अतुबू इलैही
तर्जुमा : मैं अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता हूँ जिसके सिवा कोई इबादत के लायक नहीं जो जिंदा और हमेशा रहने वाला है और मैं उसी की तरफ तौबा करता हूँ